विश्वकर्मा दर्पण

विश्वकर्मा दर्पण आदिकाल में भगवान विश्कर्मा ने अपनी निजी शक्ति का द्वारा वैज्ञानिक वरदान देकर मानव को जीवन कला सिखाई थी । आज मानव भगवान विश्वकर्मा के बताये हुये मार्ग से भटक गया है । भौतिकवाद के इस युग में भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना व भक्ति करना नितान्त आवश्यक इसलिए है कि विज्ञान के युग में दुर्घटना व मानसिक अशान्ति से मुक्ति प्राप्त केवल मात्र भगवान विश्कर्मा की शरण में जाने से ही सम्भव है । मस्तिष व मशीन का तादात्मय रहने से ही भौतिक व आध्यात्मिक प्रगति हो सकती है, इसलिये दोनों तत्वों की संचालन शक्ति भगवान विश्वकर्मा के आधीन है । स्वचलित परमाणु सयंत्र विमान व अन्य मोटर गाडी व रेलों की दुर्घटना का कारण एक ही है कि मानव सूर्य आदि सौर नक्षत्रों की गति नियमित व संचालित करने वाली समस्त ब्रह्माण्ड पर नियंत्रित रखने वाली अजस्त्र शक्ति भगवान विश्वकर्मा से विमुख होकर अपने द्वारा गढे हुए बहु भगवानो की पूजा व अन्य विश्वास के जाल में जकडकर रह गया है, तथा भौतिकवाद की छाया का शिकार हो गया है । अतः मानव के भौतिक व आध्यात्मिक सुख साधन व विकास के लिये प्रजापति विश्व ब्रह्माण्ड के...